Friday, 20 February 2015

चिन्ता में एक साथ

कविता 

अभिज्ञात


और अच्छा हो
दुनिया में मनाया जाये
धूम्रपान दिवस

पूरी दुनिया के तम्बाकू
आमने-सामने हों
सबके सीने, उसमें चलती हुई सांसे, खदबदाती हुईं
और सबके ललाट, पैर, हाथ और कंधे

कितना अद्भुत होगा
समूची दुनिया का
एक ही लत से होना साबका
होना, एक ही फ़िक्र तम्बाकू की


कितना कम है दुनिया में तम्बाकू
कितनी ज़रूरी है
और ज़रूरत की तुलना में कितनी कम
कैसे चलती आयी है दुनिया
इतनी कम तम्बाकू से
आदमी की और ज़रूरतों की तरह

हालांकि
तम्बाकू का अधिक होना
अपने अस्तित्व के लिए
संकट मोल लेना है
और तम्बाकू का अभाव
आदमी की बेचैनी को
उसकी अंतिम हद तक ले जा सकता है

कितना अच्छा है
एक ही मुद्दे पर बतियाना
और एक बड़ी चिन्ता में एक साथ
पूरी दुनिया का शरीक होना।

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