Friday, 20 February 2015

जानकारी

कविता

अभिज्ञात

कितना कम जानता हूं
मधुमक्खियों के बारे में
जब मैं कह रहा होता हूं
तुम्हारी बातों को शहद
                        
कितना कम जानता हूं
सुख के बारे में
जब मैं कर रहा होता हूं
प्रेम

फल लदे पेड़ों पर ढेला चलाते हुए
एक ठूंट ही तो होता होऊंगा।

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