Tuesday, 7 September 2010

गांगी का हाल




कविता

अभिज्ञात


मेरा छोटा सा गांव कम्हरियां
दो तरफ़ से एक वर्तुलाकार नदी से घिरा हुआ
गांगी से
क्यों पड़ है नदी का नाम गांगी
मैं नहीं जानता
और अब, जानने का कोई उपाय नहीं
आजी नहीं रही, इस जिज्ञासा के जगने तक
गांव या पास के जीवित कस्बे मेंहनाजपुर से
कोई नहीं देता गांगी की ख़बर
ज़िन्दा लोगों के लिए
बेमतलब सी क्यों हैं नदियां
हैं भी तो ख़बर लायक क्यों नहीं
कैसे पार लेते हैं लोग गांगी
बिना उसकी खोज-ख़बर लिए-दिए?
शहर में कभी-कभी आती है
गांगी के प्रकोप की ख़बर
बाढ़ के कारण, वर्षा के दिनों में
क्या यह ख़बर गांगी की होती है
या उन ज़रूरतों की जो उपजती हैं
गांगी के कारण
गांगी के कारण
क्या सिर्फ़ उपजती हैं समस्याएं?
सोचता हूं
तो गांगी के करार सा
अरराकर ढहने लगता हूं
गांगी ने दिया है..यही
अपने नम करार सा मन
गांगी की ख़बर परासों की तरह
खो गयी है
जो गांव और गांगी के बीच कभी थे
जीते-जागते अद्भुत स्तम्भ
दूर, थोड़े ऊंचे से
पा लेते हैं हम अपना गांव
देखकर परास
उसके गह-गह, टह-टह करते फूल
वहीं परासों के उस ओर है गांव
इस ओर गांगी
दोनों परासों में देख सकता है कोई
क्या गांगी सूख गयी होगी
अब आ गया होगा नहर का पानी
बाढ़... सोचते हैं कुछ अरसा बाद लौटने वाले
या फिर कोई हो तो पूछते हैं एक दूजे से
अंदाजते हुए, लगाते हुए बाजी
संभालते हुए अपने जूते
जूते का उतरना
थकान के धुलने में सहसा शामिल हो जाता है
और क्या-क्या धोती है गांगी
बीरबल लोहार का छोटका बेहतर बता सकता है
सुबह उठते ही वह गांगी से मिलता है
ज़रूरत पर लगा देता है घाट पर अपनी टुटही डोंगी
कई-कई दिनों तक
पड़ी रहती है डोंगी बिन मल्लाह
जो जिस तरफ़ जाता है, लिए जाता है अपने साथ
पालतू कुत्ते की तरह
आज्ञाकारी हो सकती है डोंगी
डोंगी के बदले कितना अनाज़ पाता है बिरबल
साल भर में
यह जानने का कोई उपाय गांगी के पास नहीं
मुश्किल से एक बार
वह गयी थी बीरबल के घर बाढ़ में आधी रात
बिरबल का पुश्तैनी घर ही समूचा
चला आया उसकी अगवानी में सदा के लिए
मिट्टी, छप्पर समेत
बिरबल का घर गांगी में है
इस वह विश्वास के साथ कहता है
मगर गांगी का
इसे कोई नहीं कहता...।

4 comments:

  1. अभिज्ञात जी,
    बहुत ही भावपूर्ण कविता, दिल को छू गई।

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  2. लाजवाब .


    पोला की बधाई भी स्वीकार करें .

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  3. ज़िन्दा लोगों के लिए
    बेमतलब सी क्यों हैं नदियां
    हैं भी तो ख़बर लायक क्यों नहीं..कोई तुलना नहीं कविता की .बहुत दिन बाद एक बेहतरीन कविता पढ़ी..

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  4. बहुत ही भावपुर्ण कविता......

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