Wednesday, 25 August 2010

हूक


कविता

अभिज्ञात

एक हूक
गांव से काम की तलाश में आये
भाई को टालकर विदा करते उठती है परदेस में

एक हूक
जो बूढ़े पिता की
ज़िम्मेदारियों से आंख चुराते हुए उठती है

मां की बीमारी की सोच
उठती है रह-रह

बहन की शादी में
छुट्टी नहीं मिलने का बहाना कर
नहीं पहुंचने पर

मैं उस हूक को
कलेजे से निकाल
बेतहाशा चूमना चाहता हूं

मैं प्रणाम करना चाहता हूं
कि उसने ही मुझे ज़िन्दा रखा है

मैं चाहता हूं कि वह ज़िन्दा रहे
मेरी आख़िरी सांस के बाद भी

मैं आंख के कोरों में
बेहद सम्भाल कर रखना चाहता हूं
कि वह चुए नहीं

हूक ज़रूरी है
सेहत के लिए
हूक है कि
भरोसा है अभी भी अपने होने पर

हूक एक गर्म अंवाती बोरसी है
सम्बंधों की शीतलहरी में।

12 comments:

  1. हूक एक गर्म अंवाती बोरसी है
    सम्बंधों की शीतलहरी में।
    ati sundar

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  2. सच्चे मन के उदगार - सच्ची इंसानी सोच सबूत के पेश करती प्रशंसनीय रचना - आभार

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  3. प्रशंसनीय रचना - आभार

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  4. इस सुंदर नए चिट्ठे के साथ आपका ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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    धन्‍यवाद

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  7. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

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  8. excellent. shows your future is great

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  9. हूक ज़रूरी है
    सेहत के लिए
    हूक है कि
    भरोसा है अभी भी अपने होने पर

    _______ संवेदना का सच्चा स्वर.

    दायित्वों का बोध काराती हूक.
    संबंधों को स्वास्थ्य का इंजेक्शन देती हूक.
    काफी कुछ कहना था, लेकिन शब्द सारे मूक.

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  10. ये हूक ही जिन्दा रखती है हमें ....हम सब को. बहुत अच्छी बात कही आपने .

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  11. सभी कविताएँ दृश्य साकार करती सी लगती है..उम्र कविता में फूलहा परातों सी का क्या अर्थ है कृप्या बताएं

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  12. बहुत ही गहरी बात

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